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सागर में जहरीली शराब का कहर: 22 मौतें, 109 अस्पताल में भर्ती; 26 से ज्यादा आरोपियों पर FIR

सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में संदिग्ध नकली और जहरीली शराब पीने से मौतों का आंकड़ा बढ़कर 22 पहुंच गया है। वहीं करीब 112 लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी सामने आई है। बड़ी संख्या में लोगों की हालत बिगड़ने के बाद प्रशासन और पुलिस ने प्रभावित गांवों में निगरानी और जांच तेज कर दी है।

सागर में जहरीली शराब का कहर: 22 मौतें, 112 अस्पताल में भर्ती; 26 से ज्यादा आरोपियों पर FIR


जानकारी के मुताबिक, बंडा क्षेत्र के कई गांवों में 4 और 5 सितंबर की रात शराब पीने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। लोगों को उल्टी, चक्कर और बेहोशी जैसी शिकायतें हुईं। गंभीर हालत में मरीजों को बंडा सिविल अस्पताल, जिला अस्पताल और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सहित अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया। कुछ गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए भोपाल रेफर किया गया है।

FIR में अवैध शराब बिक्री का जिक्र

बंडा थाने में दर्ज FIR में फरियादी अनूप सिंह लोधी ने क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री का आरोप लगाया है। FIR के मुताबिक, गांव में करीब आठ लोग कथित तौर पर अवैध रूप से शराब बेचते हैं।

बताया गया है कि 4 सितंबर को अनूप सिंह अपने भतीजे राजेंद्र लोधी के साथ जुझार लोधी की दुकान पर पहुंचे थे। राजेंद्र ने कथित तौर पर शराब नकली या जहरीली होने की आशंका जताई थी। इसके बावजूद शराब खरीदी गई। इसके बाद राजेंद्र समेत कई लोगों की तबीयत बिगड़ी और मौतों का सिलसिला शुरू हो गया।

26 से ज्यादा आरोपियों के खिलाफ मामला

पुलिस ने मामले में 26 से ज्यादा नामजद आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की है। अब तक 10 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर शराब के पूरे नेटवर्क और सप्लाई चैन का पता लगाने में जुटी है।

मामले में लाइसेंसी शराब ठेकेदार सिद्धार्थ कुशवाहा और यशवंत ठाकुर को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। हालांकि FIR में नाम होना किसी व्यक्ति के दोषी होने का अंतिम प्रमाण नहीं है और सभी आरोपों की जांच जारी है।

ललितपुर कनेक्शन की जांच

जांच में नकली शराब के उत्तर प्रदेश के ललितपुर कनेक्शन की आशंका भी सामने आई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, नकली शराब को असली ब्रांड जैसा दिखाने के लिए फर्जी रैपर, सील और QR कोड का इस्तेमाल किए जाने की जांच की जा रही है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शराब कहां तैयार हुई, उसमें कौन सा जहरीला पदार्थ मिलाया गया और ललितपुर से सागर तक इसकी सप्लाई किस नेटवर्क के जरिए हुई। शराब के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। मेथेनॉल की मिलावट की आशंका भी जांच के दायरे में है, लेकिन अंतिम वैज्ञानिक रिपोर्ट आने के बाद ही इसकी पुष्टि हो सकेगी।

अधिकारियों पर भी कार्रवाई

घटना के बाद प्रशासन ने आबकारी और पुलिस विभाग के स्तर पर भी कार्रवाई की है। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रभावित इलाकों में घर-घर स्क्रीनिंग कराई जा रही है, ताकि शराब पीने वाले लोगों की पहचान कर समय पर इलाज उपलब्ध कराया जा सके।

सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अवैध शराब के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

अब जांच के सामने तीन बड़े सवाल

इस पूरे मामले में अब पुलिस की जांच मुख्य रूप से तीन सवालों पर केंद्रित है, जहरीली शराब कहां बनी, इसमें जहरीला पदार्थ कहां से आया और इसकी सप्लाई करने वाले पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर इन सवालों के जवाब तलाश रही है।

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