दिल्ली: नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार सुबह आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने हिमालयी क्षेत्र में भारी तबाही मचा दी। नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और आसपास के इलाकों के साथ-साथ तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी बाढ़ और भूस्खलन से बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक नेपाल में 469 और तिब्बत में 3 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, यानी कुल मृतकों की संख्या कम से कम 472 तक पहुंच गई है। वहीं, दोनों देशों में 1400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।
इस आपदा का सबसे ज्यादा असर नेपाल के रसुवा जिले में हुआ है, जहां बाढ़ ने घरों, सड़कों, पुलों, बाजारों और बिजली से जुड़े ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया। कई इलाके मलबे में दब गए हैं और सड़क संपर्क टूटने के कारण राहत एवं बचाव टीमों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है। कई जगहों पर लोग अब भी अलग-थलग फंसे हुए हैं।
ग्लेशियर और चट्टानों के टूटने से आया सैलाब
वैज्ञानिकों और शुरुआती जांच के मुताबिक यह सामान्य बारिश से आई बाढ़ नहीं थी। सीमा के पास ग्लेशियर के नीचे चट्टानों के बड़े हिस्से के टूटने और उसके बाद हुए आइस-रॉक एवलॉन्च ने पानी, बर्फ, पत्थरों और भारी मलबे को तेजी से नीचे की ओर धकेला। इस मलबे ने नदी के बहाव को अचानक बेहद खतरनाक बना दिया और देखते ही देखते कई इलाकों में तबाही मच गई।
1400 से ज्यादा लोग लापता, बड़ी संख्या में विदेशी
नेपाल और तिब्बत दोनों तरफ बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। रिपोर्टों के अनुसार नेपाल में 910 और तिब्बत में 558 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री भी शामिल हैं।
इस आपदा का असर कैलाश मानसरोवर यात्रा पर भी पड़ा है। Reuters के मुताबिक नेपाल में करीब 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया है। भारत सरकार प्रभावित भारतीयों का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए नेपाल और चीन के अधिकारियों, राज्य सरकारों और टूर ऑपरेटरों के साथ लगातार संपर्क में है।
भारत ने अब तक 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी दी है। इनमें त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के 63 कर्मचारी और तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं। नेपाल में फंसे 27 विदेशी पर्यटकों को भी रेस्क्यू किया गया, जिनमें 11 भारतीय शामिल हैं।
खतरा अभी टला नहीं, नई झील से दोबारा बाढ़ का डर
सबसे बड़ी चिंता अब एक नई बनी झील को लेकर है। ग्लेशियर और मलबे के कारण नदी का रास्ता बाधित होने से सीमा के पास एक बैरियर लेक बन गई है। नेपाल और चीन के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर यह प्राकृतिक बांध टूटता है तो भारी मात्रा में पानी अचानक नीचे की ओर आ सकता है और पहले से तबाह इलाकों में एक और फ्लैश फ्लड आ सकती है।
चीनी जल अधिकारियों के मुताबिक झील में अगले कुछ दिनों में करीब 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी पहुंचने की आशंका है। लगातार बारिश की संभावना ने खतरा और बढ़ा दिया है। इसी वजह से लोगों और राहतकर्मियों को नदी के किनारे जाने से बचने की चेतावनी दी गई है।
भारत ने बढ़ाया राहत का हाथ
भारत ने नेपाल की मदद के लिए बड़े पैमाने पर राहत सामग्री भेजी है। 26 अगस्त को 10 टन मानवीय सहायता के बाद 27 अगस्त को भारतीय वायुसेना के विमान से 37.5 टन और राहत सामग्री, दवाइयां और खाद्य पैकेट भेजे गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह से बात कर भारत की पूरी मानवीय सहायता का भरोसा दिया है।
अमेरिका भी मदद के लिए आगे आया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेपाल को जरूरत के मुताबिक हर संभव सहायता देने का भरोसा दिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने भी नेपाल में आपदा राहत के लिए 5 लाख डॉलर की सहायता देने की घोषणा की है। यह राशि आपातकालीन आश्रय, राहत सामग्री और पानी, स्वच्छता एवं स्वास्थ्य संबंधी सहायता में इस्तेमाल की जाएगी।
फिलहाल नेपाल और तिब्बत में सेना, पुलिस, हेलिकॉप्टर, ड्रोन और जमीनी टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। लेकिन तबाह सड़कें, टूटे पुल, भारी मलबा और दोबारा बाढ़ आने का खतरा बचाव अभियान को बेहद मुश्किल बना रहा है। हजारों परिवार अब भी अपने लापता परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित इलाकों तक पहुंचकर ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकालना है।
