एक्टर राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में किया सरेंडर, हाई कोर्ट की सख्ती के बाद आत्मसमर्पण

चेक बाउंस मामले में एक्टर राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में किया सरेंडर, हाई कोर्ट की सख्ती के बाद आत्मसमर्पण

एक्टर राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल में किया सरेंडर, हाई कोर्ट की सख्ती के बाद आत्मसमर्पण
अभिनेता राजपाल यादव

नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव ने चेक बाउंस से जुड़े एक पुराने मामले में तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण कर दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट के सख्त रुख और बार-बार राहत देने से इनकार के बाद गुरुवार को एक्टर ने जेल अधीक्षक के समक्ष सरेंडर किया। यह मामला करीब 15 साल पुराना है, जिसमें करोड़ों रुपये के बकाया भुगतान को लेकर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद तिहाड़ जेल में सरेंडर

दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को 4 फरवरी तक सरेंडर करने का आदेश दिया था। हालांकि, तय तारीख पर सरेंडर न करने को लेकर कोर्ट ने नाराजगी जताई। इसके बाद राजपाल यादव ने एक बार फिर व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर राहत की मांग की और कहा कि वह 25 लाख रुपये लेकर आए हैं तथा शेष राशि भी जल्द चुका देंगे।

लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि पहले सरेंडर जरूरी है, उसके बाद ही किसी तरह की राहत पर विचार किया जा सकता है।

पहले कई मौके दिए गए, अब और नहीं: हाई कोर्ट

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि राजपाल यादव को पहले कई बार राहत दी गई थी। ये राहतें उनके द्वारा दिए गए आश्वासनों के आधार पर थीं कि वह शिकायतकर्ता कंपनी के साथ विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लेंगे और बकाया रकम का भुगतान कर देंगे।

कोर्ट ने कहा कि इसके बावजूद आज भी करीब 9 करोड़ रुपये की राशि बकाया है, जो अब तक अदा नहीं की गई।

बार-बार नियम तोड़ने पर कोर्ट की फटकार

कोर्ट ने यह भी कहा कि राजपाल यादव द्वारा बार-बार तय शर्तों और समय सीमाओं का उल्लंघन किया गया। कई मौकों पर भुगतान के लिए समय दिया गया, किश्तों और डिमांड ड्राफ्ट के जरिए रकम जमा करने की अनुमति दी गई, लेकिन हर बार भुगतान नहीं हो सका।

डिमांड ड्राफ्ट में तकनीकी और टाइपिंग गलती का हवाला दिए जाने पर भी कोर्ट ने नाराजगी जताई और इसे भरोसे के लायक नहीं बताया।

सरेंडर न करने पर जज की सख्त टिप्पणी

5 फरवरी को राजपाल यादव अपने वकील के साथ कोर्ट में पेश हुए। वकील ने दलील दी कि एक्टर सरेंडर नहीं कर पाए क्योंकि वह शिकायतकर्ता कंपनी को भुगतान के लिए पैसों की व्यवस्था कर रहे थे और देर से दिल्ली पहुंचे।

इस पर जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि न्यायिक आदेश का पालन करने में कोई बाधा नहीं थी। उन्होंने टिप्पणी की, जो लोग कानून का सम्मान नहीं करते, उन्हें कानून से किसी भी तरह की अनुकूलता की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए।

क्यों नहीं सुलझ पाया विवाद?

हाई कोर्ट ने बताया कि जून 2024 में राजपाल यादव की सजा पर रोक लगाई गई थी ताकि उन्हें आपसी समझौते के जरिए मामला सुलझाने का मौका मिल सके। लेकिन तय समय सीमा के भीतर न तो विवाद सुलझा और न ही बकाया रकम का भुगतान हुआ। इसके बाद कोर्ट ने सरेंडर का आदेश दिया, जिसका पालन अब जाकर किया गया।

क्या है पूरा चेक बाउंस मामला?

यह मामला साल 2010 से जुड़ा है।

राजपाल यादव ने डायरेक्टर के तौर पर ‘अता पता लापता’ नाम की फिल्म बनाई थी। इसके लिए उन्होंने मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही और राजपाल यादव कर्ज की रकम लौटाने में असमर्थ रहे।

बाद में भुगतान के लिए दिए गए चेक बाउंस हो गए। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता भी हुआ, लेकिन पूरी रकम फिर भी नहीं चुकाई जा सकी। समय के साथ ब्याज जुड़ता गया और राशि बढ़ती चली गई।

2018 में दोषी करार, 6 महीने की सजा

इस मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने साल 2018 में राजपाल यादव को दोषी ठहराया और उन्हें 6 महीने की जेल की सजा सुनाई थी। इसके बाद एक्टर ने ऊपरी अदालत में अपील की, जहां उन्हें कई बार अंतरिम राहत मिली। बावजूद इसके, बकाया रकम का भुगतान नहीं हो सका, जिसके चलते अब उन्हें सरेंडर करना पड़ा।

चेक बाउंस के इस लंबे मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की सख्ती साफ संकेत देती है कि अदालत अब किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है। तिहाड़ जेल में सरेंडर के बाद राजपाल यादव की आगे की कानूनी राह कोर्ट के अगले आदेश पर निर्भर करेगी। यह मामला न सिर्फ एक अभिनेता के लिए, बल्कि चेक बाउंस मामलों में अदालत के सख्त रुख का भी उदाहरण बन गया है।

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