भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता: टैरिफ में कटौती, बाजार खुले, रूसी तेल मुद्दा भी शामिल

भारत-अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौता: टैरिफ में कटौती, बाजार खुले, रूसी तेल मुद्दा भी शामिल

भारत और अमेरिका के बीच कई महीनों से चल रहे व्यापारिक तनाव के बाद एक बड़ी कूटनीतिक सफलता सामने आई है। दोनों देशों ने अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) की एक रूपरेखा पर सहमति जता दी है। यह सहमति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच उच्चस्तरीय बातचीत के बाद बनी। इसे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नए चरण की शुरुआत माना जा रहा है।

यह समझौता अभी अंतिम द्विपक्षीय व्यापार संधि नहीं है, बल्कि एक अंतरिम ढांचा है, जिसका उद्देश्य तत्काल व्यापारिक अड़चनों को कम करना और आगे एक व्यापक व्यापार समझौते का रास्ता तैयार करना है।

📉 टैरिफ विवाद कैसे सुलझा

हाल के महीनों में अमेरिका ने भारत से आयातित कई वस्तुओं पर शुल्क बढ़ा दिया था। इनमें रूस से तेल खरीद के मुद्दे पर लगाया गया अतिरिक्त 25% दंडात्मक शुल्क भी शामिल था, जिससे कुल टैरिफ कुछ मामलों में 50% तक पहुंच गया था। अब नए अंतरिम समझौते के तहत अमेरिका ने इन ऊंचे शुल्कों को घटाकर लगभग 18% करने का फैसला किया है। इससे भारतीय निर्यातकों खासकर टेक्सटाइल, रसायन, इंजीनियरिंग सामान और उपभोक्ता वस्तुओं को राहत मिलने की उम्मीद है।

भारत क्या करेगा?

  • भारत ने भी इस समझौते के तहत कई प्रतिबद्धताएँ जताई हैं:
  • अमेरिका से आने वाली औद्योगिक वस्तुओं और कुछ कृषि/खाद्य उत्पादों के लिए अपना बाजार खोलने पर सहमति
  • व्यापार में बाधा बनने वाली गैर-टैरिफ रुकावटें, जैसे जटिल आयात लाइसेंसिंग प्रक्रियाएँ, कम या समाप्त करने का वादा
  • आने वाले पाँच वर्षों में लगभग 500 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पाद ऊर्जा, विमान, विमान पुर्जे, तकनीक, धातुएँ और कोकिंग कोयला खरीदने का इरादा
  • यह लक्ष्य भारत के अमेरिका से मौजूदा आयात स्तर का लगभग दोगुना माना जा रहा है।

🛢️ रूसी तेल खरीद सबसे संवेदनशील मुद्दा

इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू रूस से तेल खरीद का मुद्दा रहा। अमेरिका ने पहले भारत पर दबाव डाला था कि वह रूस से कच्चा तेल खरीदना कम करे, यह तर्क देते हुए कि इससे यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस को आर्थिक मदद मिलती है। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार भारत ने रूसी तेल के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आयात को रोकने की प्रतिबद्धता जताई है। इसी आधार पर अमेरिका ने अतिरिक्त 25% शुल्क हटाने का फैसला किया।

हालाँकि भारत सरकार ने सार्वजनिक रूप से इस पर विस्तृत जानकारी नहीं दी है। विश्लेषकों का कहना है कि आयात में कुछ कमी आई है, लेकिन रूस अब भी भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में बना हुआ है। अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि भारत भविष्य में फिर से बड़े पैमाने पर रूसी तेल आयात करता पाया गया, तो वह 25% शुल्क फिर से लागू कर सकता है।


🌍 गैर-टैरिफ बाधाओं पर भी सहमति


दोनों देशों ने व्यापार को प्रभावित करने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने पर भी सहमति जताई है। इनमें शामिल हैं:

आयात लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को सरल बनाना

उत्पाद मानकों और निरीक्षण प्रक्रियाओं में तालमेल

तकनीकी और नियामकीय सहयोग बढ़ाना

इन कदमों से कंपनियों को सीमा पार व्यापार करने में कम प्रशासनिक अड़चनें आएँगी।


🗣️ नेताओं की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे भारत-अमेरिका संबंधों में “नए भरोसे और साझेदारी” का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता रोजगार, निवेश और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देगा। अमेरिकी पक्ष ने भी इसे दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच आर्थिक संबंधों को गहरा करने वाला कदम बताया है।


📊 भारत पर संभावित प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार इस समझौते से

भारतीय निर्यात को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है

ऊर्जा और विमानन क्षेत्रों में बड़े सौदे संभव

विनिर्माण और “मेक इन इंडिया” को गति

लेकिन कुछ घरेलू क्षेत्रों, विशेषकर कृषि, पर प्रतिस्पर्धा बढ़ने की आशंका


निष्कर्ष

भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच बिगड़े व्यापारिक माहौल को सुधारने की दिशा में अहम कदम है। यह अभी शुरुआती ढांचा है, लेकिन इससे स्पष्ट है कि दोनों देश रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को और गहरा करना चाहते हैं। आगे की वार्ताओं में इसे एक पूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौते का रूप दिया जा सकता है।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने