पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में जुमे की नमाज़ के दौरान शिया इमामबाड़े के सभा हॉल में भीषण विस्फोट, कम से कम 32 लोगों की मौत, 100 से अधिक घायल

 पाकिस्तान में शिया सभा हॉल में जानलेवा धमाका, एक दर्दनाक घटना

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में जुमे की नमाज़ के दौरान शिया इमामबाड़े के सभा हॉल में भीषण विस्फोट, कम से कम 15 लोगों की मौत, 80 से अधिक घायल


पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुक्रवार (6 फरवरी 2026) दोपहर को एक भयंकर विस्फोट हुआ, जिसने देश और अंतरराष्ट्रीय मंच पर चिंता और सदमे की लहरें दौड़ा दीं। यह हमला उस समय हुआ जब शिया समुदाय के लोग जुमे की नमाज और धार्मिक सभा के लिए इकट्ठा थे। 

धमाके का स्थल इस्लामाबाद के शहज़ाद टाउन इलाके के तरलाई इमामबाड़ा (Tarlai Imambargah) के निकट एक सभा हॉल था। विस्फोट इतनी तीव्र थी कि वहां मौजूद बड़ी संख्या में लोगों को गंभीर रूप से चोटें आईं और आनन-फानन में अस्पतालों में भर्ती कराया गया। 


क्या हुआ?

स्थानीय मीडिया और अधिकारियों के अनुसार, विस्फोट जुमे की नमाज़ के दौरान हुआ, जब सभा hall पूरी तरह भरा हुआ था। प्रारंभिक रिपोर्टों में धमाका आत्मघाती बम हमले जैसा बताया जा रहा है, हालांकि जांच जारी है कि यह हमला अंदर हुआ या मुख्य द्वार पर। 


मानव जीवन पर प्रभाव

इस दर्दनाक घटना के तुरंत बाद मिली जानकारी के अनुसार:

कम से कम 32 लोगों की मौत हो चुकी है। 

100 से अधिक लोग घायल हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। 

घायल लोगों को पास के बड़े अस्पतालों जैसे Pakistan Institute of Medical Sciences (PIMS) और Polyclinic Hospital में भर्ती कराया गया है, जहां आपातकालीन चिकित्सा सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं। 


स्थानीय प्रतिक्रिया और बचाव कार्य

घटना के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने राहत और बचाव अभियान शुरू किया। 

इस्लामाबाद में आपात स्थिति (Emergency) घोषित कर दी गई। 

सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटी हैं कि यह हमला किसने किया और क्या इसका उद्देश्य किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाना था। 


देश में बढ़ती हिंसा की पृष्ठभूमि

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर शिया मुसलमानों, पर पहले भी कई हमले हो चुके हैं। पिछले वर्षों में विभिन्न आतंकवादी तथा उग्रवादी समूहों ने ऐसे हमलों की जिम्मेदारी ली है या उन पर संदेह जताया गया है। इस तरह के हमले अक्सर साम्प्रदायिक तनाव और आतंकवादी गतिविधियों का हिस्सा रहे हैं। 

यह हमला न केवल मृतकों और घायल लोगों के परिवारों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि पूरी पाकिस्तानी समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है। ऐसे समय में सुरक्षा व्यवस्था, साम्प्रदायिक सद्भाव और आतंकवाद-विरोधी प्रयासों को और सशक्त करने की आवश्यकता है ताकि ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।

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