नई दिल्ली। देश में जनगणना 2027 की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक होने जा रही है। करीब 95 साल बाद देश में सभी जातियों की गणना की जाएगी। इसके साथ ही भारत में पहली बार पूरी जनगणना डिजिटल तरीके से कराई जाएगी। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, देश के अधिकांश हिस्सों में जनगणना का दूसरा चरण 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक चलेगा।
इस चरण में अधिकारियों की टीमें घर-घर जाकर लोगों से करीब 40 सवाल पूछेंगी। इनमें परिवार के सदस्यों, आवास, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों से जुड़े सवाल शामिल होंगे। इससे पहले घरों की सूची तैयार करने और मकानों की गणना का पहला चरण 2026 में पूरा किया गया है।
ऑनलाइन भी भर सकेंगे अपनी जानकारी
इस बार लोगों को स्व-गणना यानी Self Enumeration की सुविधा भी मिलेगी। इसके तहत 10 से 24 जनवरी 2027 तक नागरिक निर्धारित सरकारी पोर्टल पर खुद अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके बाद जनगणना कर्मचारी घर-घर जाकर जानकारी का सत्यापन और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करेंगे।
95 साल बाद होगी सभी जातियों की गणना
इस जनगणना की सबसे बड़ी विशेषता जातिगत गणना है। वर्ष 1931 के बाद पहली बार देशव्यापी जनगणना में सभी जातियों से संबंधित आंकड़े जुटाए जाएंगे। आजादी के बाद जनगणना में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के आंकड़े जुटाए जाते रहे हैं, लेकिन सभी जातियों की व्यापक गणना नहीं हुई थी।
उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में अलग कार्यक्रम
विधानसभा चुनावों को देखते हुए उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड में जनगणना का कार्यक्रम अलग रखा गया है। इन राज्यों में ऑनलाइन स्व-गणना 16 से 30 नवंबर 2026 तक होगी, जबकि घर-घर जाकर जनगणना 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक कराई जाएगी। मणिपुर में जनगणना का कार्यक्रम अगली अधिसूचना तक स्थगित रखा गया है।
वहीं, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के निर्धारित बर्फबारी वाले क्षेत्रों में अलग समय-सारणी के तहत जनगणना की प्रक्रिया पहले ही कराई जा चुकी है।
सरकार के अनुसार, जनगणना की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की रात 12 बजे निर्धारित की गई है। डिजिटल तकनीक, ऑनलाइन स्व-गणना और जातिगत आंकड़ों के संग्रह के कारण जनगणना 2027 देश के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जा रही है।
