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ट्विशा शर्मा मौत मामला: सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, मीडिया ट्रायल पर रोक की नसीहत

भोपाल की एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मीडिया कवरेज और दोनों पक्षों की सार्वजनिक बयानबाजी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कुछ गतिविधियों की वजह से अदालत को “तकलीफ” हुई है। कोर्ट ने मीडिया से अपील की कि वह पीड़ित परिवार या दूसरे पक्ष के बयानों के पीछे न भागे और मामले को कानून एवं जांच प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ने दे।

ट्विशा शर्मा मौत मामला: सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, मीडिया ट्रायल पर रोक की नसीहत

CJI की मीडिया से अपील

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि जांच प्रभावित न हो, इसके लिए दोनों पक्षों को संयम बरतना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई भी जानकारी केवल जांच एजेंसियों और अधिकृत अधिकारियों को ही दी जाए। अदालत ने मीडिया से भी संवेदनशीलता बरतने को कहा और पीड़ित परिवार के दर्द को “क्लिप्स और सनसनी” में न बदलने की सलाह दी।

सुप्रीम कोर्ट ने खुद क्यों लिया संज्ञान

कोर्ट ने बताया कि 18 मई को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट में जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि मृतका का पति पेशे से वकील है और उसकी मां पूर्व जिला जज रही हैं, ऐसे में जांच पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई थी। इसी आधार पर अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की।

CJI ने कहा कि रिपोर्ट में संस्थागत पूर्वाग्रह और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए गए थे, जिन्हें देखते हुए अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा।
भोपाल की एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई।


सॉलिसिटर जनरल का बड़ा आरोप

मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि ट्विशा की सास और पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह जांच में बाधा डाल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वे अलग-अलग मीडिया चैनलों पर जाकर मृतका की छवि खराब करने की कोशिश कर रही हैं।

तुषार मेहता ने अदालत में भावुक टिप्पणी करते हुए कहा, “इस पूरी कहानी का नैतिक सार यही है कि एक मृत बेटी होने से बेहतर है कि वह तलाकशुदा बेटी होती।”

बचाव पक्ष ने जांच पर उठाए सवाल

गिरिबाला सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने पुलिस जांच पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि FIR दर्ज करने में तीन दिन की देरी हुई और शुरुआती सबूतों को सुरक्षित रखने में भी लापरवाही बरती गई।

उन्होंने अदालत को बताया कि गिरिबाला सिंह खुद अपने कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स जांच एजेंसियों को उपलब्ध करा रही हैं, जिससे यह साबित होता है कि वे जांच में सहयोग कर रही हैं।

हाईकोर्ट में भी अहम सुनवाई

इधर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी इस मामले से जुड़ी अहम सुनवाई प्रस्तावित है। राज्य सरकार और ट्विशा के पिता ने गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की है। यह मामला जस्टिस देवनारायण मिश्रा की कोर्ट में सूचीबद्ध है।

हालांकि एडवोकेट पंकज दुबे का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही और संभावित आदेश को देखते हुए हाईकोर्ट फिलहाल सुनवाई टाल सकता है।

कॉल डिटेल और CCTV फुटेज पर भी सुनवाई

भोपाल जिला अदालत में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह की 12 मई से 20 मई तक की कॉल डिटेल रिकॉर्ड तथा भोपाल AIIMS के CCTV फुटेज सुरक्षित रखने की मांग वाली अर्जी पर भी सुनवाई होनी है।

आत्महत्या या हत्या? दोनों परिवारों के दावे अलग

ट्विशा शर्मा की मौत को लेकर दोनों परिवारों के दावे पूरी तरह अलग हैं। ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि मायके वालों ने पति और ससुराल पक्ष पर हत्या का आरोप लगाया है। मामले की जांच जारी है और अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हुई है।

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